“यूपी में एमआईएम की दस्तक है खतरनाक”- असीम त्रिवेदी

राजनीति में कभी भ्रष्टाचार का डंका पीटा जाता है तो कभी सांप्रदायिकता को ऐसे सिरे से उठाया जाता है जहां पर मजहबों के बीच तनाव की स्थिति उत्तपन्न होने के अवसर ज्यादा हों. वहीं नारी के साथ सशक्त या विभक्त होने के तमाम उदाहरण भी चिपकते हैं. जिसमें सवाल होते हैं, जवाबों की उम्मीद होती है. हां इनमें हवाला अनुभव के आधार पर भी किया जाता है, दरअसल समाज के कुछ उन पैरोकारों से जानने की उम्मीद होती है कि समाज गर्त की ओर लगातार पलायन क्यों करता जा रहा है. जी हां इसी दिशा में आज आपके आत्मीय ने बातचीत की एक चर्चित कार्टूनिस्ट और कार्यकर्ता असीम त्रिवेदी के साथ…

पहला सवाल- असीम जी आप कार्टून्स के कारण चर्चा में रहे लेकिन आप उन कार्टून्स को क्या अब गलत मानते हैं?

Cartoons made by Aseem Trivedi on Corruption in Nation.
Cartoons made by Aseem Trivedi on Corruption in Nation.

जवाब- बिलकुल नहीं बल्कि वो सारे कार्टून्स राजनीति की वास्तविक दशा और दिशा को दिखा रहे थे. हालांकि कुछ लोग इसे लेकर अपमान, सम्मान और तमाम बातों पर आ टिके लेकिन काफी सारे लोगों ने मुझे सपोर्ट भी किया. आप पुराने सिनेमा को उठाकर देख लीजिए, जिसमें पॉलिटिक्स, पुलिस आदि को कमजोर या फिर करप्ट दिखाया जाता है. तो क्या वो गलत है शायद क्या बिलकुल भी नहीं लेकिन हां मैं ये जरूर कहूंगा कि सच्चाई को सामने वो अपने तरीके से लाए और मैं अपने तरीके से.

दूसरा सवाल-  मौजूदा राजनीति पर आप क्या कहना चाहेंगे.

जवाब- आज राजनीति में भ्रष्टाचार से ज्यादा सांप्रदायिकता के पैर बढ़ने लगे हैं. बस फिर क्या मजहब के नाम पर कत्लेआम होता है और सियासतदां उसे अपनी अपनी तरह से उठाते हैं और बोली लगाते हैं. सब अपने आप को धर्म, जाति के स्टीकर के साथ चिपका लेते हैं. फिर हम उसे नाम क्या देते हैं कि राजनीति का ध्रुवीकरण हो गया. अजी इस ध्रुवीकरण के अलावा जो लोगों के दिलों में ऩफरत पैदा हो गई है उसे कभी आपने झांककर देखा. शायद किसी ने ऐसी जहमत उठाई हो.

तीसरा सवाल- सांप्रदायिकता की वजह कौन है.

जवाब- निश्चित ही सांप्रदायिकता की वजह ये राजनीति के ठेकेदार ही हैं, लेकिन इसमें बीजेपी सबसे ऊपर नजर आती है. दरअसल आरएसएस, वीएचपी समेत तमाम संगठन जो धर्म का झंडा लेकर बीजेपी को साधती है वो समाज को बांटने का काम प्रमुखता से करती रही है. हां इन सबके इतर लोगों के भीतर की इंसेंसिटिविटी भी इसका कारण है. जरा सा कोई मुद्दा मिला बस लोग आडम्बर के उन प्रतीकों के साथ एकदम तत्पर हो जाते हैं. जो कि पूर्णतया गलत है.

चौथा सवाल- असीम जी बिहार में माना जा रहा है कि चुनाव मंडल बनाम कमंडल हो रहा है तो किसी एक की जीत होने से क्या असर पड़ेगा.

जवाब-  मंडल जीतेगा तो भी लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा और अगर कमंडल की जीत होगी तो माहौल और बिगड़ने की संभावनाएं हैं. क्योंकि एक जाति को मुद्दा बनाकर लोगों को बांट रहे हैं तो दूसरा धर्म को लेकर सियासत करने की कोशिश कर रहे हैं. जो कि लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है.

पांचवा सवाल- राजनीति में विवादित बयानों की बयार सी आ गई है इसका कारण आप किसे मानते हैं.

जवाब- Himanshu जी आपको बता दूं कि आज राजनीति करने वाले सफेदपोशियों के पास कोई मुद्दा नहीं. विकास की वो इबारतें भी खत्म हो चुकी हैं. फिर चुनाव कैसे और किस आधार पर लड़ा जाए. बस इसीलिए बयानों के आधार पर चुनाव हो रहे हैं. कहीं न कहीं राजनीति के इन लंपटों को पता है कि किस तरह से मीडिया का फायदा उठाना है. तो ये विवादित बयानों के सहारे ही लोगों को तोड़ते हैं और अपने वोट के तौर पर जोड़ते हैं. बहरहाल जिस तरह का माहौल है उसको देखते हुए लग रहा है कि बीजेपी 2017 में होने वाले यूपी में विधानसभा चुनावों में फायदा उठा सकती है. क्योंकि देश में सांप्रदायिकता हर दिल में घर बना चुकी है. लोग लहू के रंग में फर्क पैदा करने में सफल नजर आ रहे हैं. अगर बीजेपी यूपी में जीत दर्ज करती है तो ये काफी बुरा दौर होगा.

छठा सवाल-  यूपी में समाजवादी सरकार है और अपराध का ग्राफ भी काफी ऊपर है आप यूपी के ही रहने वाले हैं तो आप इसे किस तरह से देखते हैं.

SP_Vpaksh

जवाब- इन अपराधों को हमारा समाज डिजर्व करता है. क्योंकि लोग उसे अपना नेता बनाते हैं जिसके पास गाड़ियों की लंबी लंबी कतारें होंगी, पैसा होगा, बाहुबली होंगे. आज आप अगर विश्लेषण करें तो पाएंगे कि वो घटिया लोग चुनाव लड़ते हैं जो माफिया हैं, आपराधिक प्रवृत्ति के हैं. उन्हें जीत भी मिल जाएगी क्योंकि या तो लोग उनसे डरते हैं या फिर उन्हें ऐसे ही लोग पसंद हैं. तो कहां से समाज में अच्छाई आएगी. ये सिस्टम ही बुरा है. अब इससे अपराध के अलावा किस चीज की उम्मीद की जा सकती है.

सातवां सवाल- न्यूज चैनल्स में बैठकर घंटों बदलाव पर चर्चा होती है पर बदलाव क्यों नहीं होता.

जवाब- देखिए ये सारा का सारा एक ड्रामा है. आपने नेताओं को डीबेट में लड़ते हुए देखा होगा. तमाम बातें होती हैं लेकिन डीबेट के खत्म होते ही वे सभी लोग उस डीबेट वाले मु्द्दे को झाड़ते हुए आगे बढ़ जाते हैं. अगर सच में वे इन सभी मुद्दों को गंभीरता से लें साथ ही उन पर काम करें तो निश्चित ही बदवाल होंगे.

आठवां सवाल- आप यूपी के रहने वाले हैं जहां बसपा और सपा ही अलट-पलट कर सत्ता में काबिज होती रही हैं, जनता सपा को आपराधिक पार्टी और बसपा को कुछ फीसदी सुधारों के साथ क्यों देखती हैं.

जवाब- दरअसल इसके पीछे का कारण ये है कि जनता ने विकल्प के तौर पर इन दोनों को ही रखा हुआ है. बीजेपी के यूपी में आने से तो अच्छा है कि कुछ अपराधों वाली पार्टी ही सूबे में आए. रही बात बसपा की तो वह एक तानाशाही के साथ चलने वाली पार्टी है. जो कि प्रशासन और अन्य विभागों को जातिगत मजबूती देते हुए सख्ती बरतती है. आप देख लीजिए हरिजन एक्ट का वो कानून जिसका मायवती सरकार में जमकर फायदा उठाया जाता है. तो कहीं न कहीं सभी एक जैसे ही हैं.

नौवां सवाल- यूपी में इस बार असद्दुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआईएम भी चुनावों में शामिल हो रही है, क्या होगी इसके बाद यूपी की स्थिति.

Owaisi_vpaksh

जवाब- और बद्तर हो जाएगी. एमआईएम एक खतरनाक इरादों वाली पार्टी है. जो समाज की जड़ों में धर्म से जुड़ा जहर घोलने आ रही है. कहीं न कहीं मुझे तो बीजेपी और एमआईएम दोनों के उद्देश्यों से डर लगता है. इन दोनों के इतर अन्य चोरों में से कोई भी यूपी की सत्ता में आए तो ठीक है.

अंतिम सवाल- अरविंद केजरीवाल के बारे में आप क्या नजरिया रखते हैं.

जवाब- सभी पार्टियों से उनकी पार्टी कुछ अलग कर रही है. अगर विकास की रफ्तार तेज नहीं है तो ये भी नहीं है कि विकास नहीं हो रहा. लेकिन वे बाकी लोगों से तो बेहतर ही हैं.

असीम अपने कार्टून्स के जरिए भारत की स्थिति को उकेरते रहे हैं. हालांकि कुछ कार्टून्स को विवादित माना गया और उन्हें जेल भी जाना पड़ा. फिलवक्त असीम त्रिवेदी एक जाना-माना नाम हैं. यूपी में शुक्लागंज के रहने वाले असीम राजनीति को किस तरह से देखते हैं ये आप सभी ने जाना. लेकिन अब तय आपको करना है कि राजनीति आपकी निगाहों की अच्छी है या फिर असीम की. हम यूं ही लोगों से आपको रूबरू कराते रहेंगे, उनकी सोच से आपका परिचय कराने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं.

SHARE
Previous articleRajkot ODI Update: Hardik Patel detained by Rajkot Police officials on Patel Stir
Next articleSena attacks Pakistani Umpire: Is playing cricket with Pakistan Anti-national?
जागरण इंस्टीट्यूट से पढ़ाई करने के बाद न्यूज एक्सप्रेस चैनल को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर ज्वाइन किया. जिसके बाद कद बढ़ा दिया गया और प्रोड्यूसर का कार्य संभालने लगा. लेकिन अनुुभव प्रिंट का और वेब का भी लेना था इसलिए दैनिक जागरण का टैब्लॉयड पेपर आईनेक्स्ट ज्वाइन किया. फिलवक्त स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहा हूं. हां संस्थानों से जुड़ाव जारी रहेगा. क्योंकि दीदार का शौक है और नजर तनिक खबरिया है.

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY